Thursday, 10 March 2011

जनता से छीने अधिकार



प्रदेश में ये क्या हो रहा है....क्या ये वही प्रदेश है जिसे लोग उत्तम प्रदेश के नाम से जानते है...या फिर वो प्रदेश है जिसे लोग उत्तर प्रदेश कहते है.. इस प्रदेश में आज कल कुछ दिनों से काफि सर्गियां तेज है आखिर कार क्या मामला है जिससे ये प्रदेश आये दिन चर्चा में रहता है... ये प्रदेश कभी बलात्कार के मामलों में तो कभी चमचागिरी के मामलों में लोगो के सामने आते रहता है...जी हां हम बात कर रहे उसी उत्तम प्रदेश की जो सरकरी आंकड़ो मे ही उत्तम है.... जहां अब आम जनता के साथ खेला जा रहा है एक ओर सौतेला व्यवहार....ये व्यवहार केवल 2012 में होने वाले विधानसभा चुनाव के दौरान हो रहा है...क्यों कि यूपी का राजनीति ही है जो देश और प्रदेश की राजनीति को तय करती है...जिसका अब पूरा फायदा उठाने में लगी है माया मैम साहब.....
उत्तर प्रदेश में 2012 में विधान सभा चुनाव होने है और उस पहले 2011 के सितम्बर या अक्टूबर प्रदेश में नगर निगम के चुनाव है...जिसके चलते माया मैम कोई भी मौका नही खूना चाहती है...उसके लिये माया सरकरा ही नही अन्य पार्टियों ने भी तैयैरी शुरु कर दी है... जिसके लिये बीएसपी ने एक नयी चाल चलकर लोगो को बता दिया कि चाहे कुछ भी हो जाये सरकार उनकी आयेगी...जिसके लिये वो हर सम्भव प्रयास कर रही है.....ओर उनका ये प्रयास आम जनता के सामने तब आया जब माया सरकार ने विधान सभा में विधेयक रखा कि लोगो को अब नगर निगम और नगर पंचायत के अध्यक्षो को नहीं चुन्नेगे और इन्हे सिर्फ चुने हुए प्रत्याशी ही चुनेगे..... जिस लेकर लोगो के अंदर काफी रोष व्यापत है....कि उनक अधिकारो के साथ ही सरकार क्यो खेलती है और उनकी परेशानी को अब कौन सुनेगा जब ये विधेयक पास हो जायेगा...... वही इस देश मे जहां जनता को सिर्फ एक ही अधिकार था कि अपने मत के प्रयोग से अपने शहर की सम्सयाओँ को का निदान कराने के लिये वो अपना प्रतिनिधि चुनकर उन पर अम्ल करा सकता था लेकिन सत्ता की भूख ने वो भई आज उनसे छईनने की मुहीनम चला दी है....जिसके चलते आज जनता ही नही पूरे प्रदेश में केवल एक ही चर्चा है कि अब जनता को क्या अधिकार है...यदि हम दूसरे देशओ की बात करे तो अमेरिका एक एसा देश है जहां का पूरा लोक तंत्र जनता के कंधो पर होता है लेकिन हामारे देश में ये अधिकार तो दूर अब शहर के मैयर को भी चुनने का अधिकार माया सरकार खत्म कर ने जा रही है...
इस विधेयक में यह प्रस्ताव रखा गया है कि लोगो को सिर्फ उनके क्षेत्र का साभसद या पार्षद ही चुनने का अधिकार दिया जाये ताकि वो सही पार्षद को चुनकर भेज सके...लेकिन जब जनता ही उसका विरोध करे तो फिर क्या कहना.... पहल पत्रिका ने इस विधेयक के चर्चाओँ में आते ही पूरे प्रदेश में एक मुहीम तैयार की ओर जनता से जानान चाहा कि वो क्या सोचती है इस विधेयक के बार में... तो जनता का एक ही फैसला है कि सरकार कोई भी मंत्री या नेता तो हमारे पास हमारी समस्याओं को सुनने आता नही तो फिर हम कैसे अपना अधिकार को खत्म करने की इज्जात दे इस माया सरकार को ... हमें तो अब अपना प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति तक चुनने का अधिकार मिलना चाहिये......लेकिन ये सरकार तो हम से हमारे ही हक को छीनना चाहती है.... वही जनता के साथ साथ विपक्ष ने भी इस विधेयक पर तीर चलने से पीछे नही हटी ....विपक्षियों की माने तो ये माया की तानाशाही है जो जनता के मताधिकार के साथ खेलना चाहती है...लेकिन पहल इस मुहीम की पर सरकार से कई सबला पूछाना चाहती है कि क्या वो आम जनता के अधिकारों के साथ खेल नही रही है.....या फिर सरकार अपने फायदे के लिये ये सब कुछ कर रही है... ये सारे जबाब जनता मांग रही है माया वती जी से ,....लेकिन माया ये भूल रही है कि जनता से उनके मताधिकार को छीनना कहीं उन्हें महांग पड़ जाये.... क्यों ये जनता है बहुत खुछ जानती है और अच्छे नेताओं को भी सिखा देती गद्दी की गर्मी का सुख....




बाइट --- ये सरकार हमारे मताधिकार को अपने सुख के लिये खरीदना चाहती है.... ताकि उसके लोग ही शासन करें...ओर हमारे सुखो के साथ खेल सके... कमलेश चतुर्वदी, मऊरानीपुर (झांसी)
मायवती अपना राज्य दुबारा लाने के लिये ये सारे षड़यंत्रो को रच रही है... ताकि वो प्रदेश की जनता पर दुबारा शासन कर सके....
अभिनय सेठ, बांदा

बाइट---- माय का ये विधेयक लोगो के माताधिकार को छीनने की कोशिश कर रहा है...ताकि लोगो को उनका सचा सेवक नहीं मिल पाये......
रविन्द्र शुक्ला , पूर्व शिक्षामंत्री उ.प्र.

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