Thursday, 10 January 2013

यूपी सरकार को नहीं है शहीदों की परवाह...

शहादत का न्यौता देदे मुझे तभी तो आऊंगा उस शहीद को श्रद्धांजलि देने...पैड़े तो हमने आज मथुरा में खूब खाए लेकिन तुमने शहादत का न्यौता नहीं दिया तभी तो हम नहीं आए ...... जी हां ये हैं यूपी के मंत्री दुर्गाप्रसाद यादव जी .. जिनको शहादत का निमंत्रण चाहिए .... क्योंकि उन्हे शहीद के अंतिम संस्कार का न्यौता नहीं मिला .... वहीं सीएम अखिलेश यादव अपने कुछ नेताओ और मंत्रियों के साथ मथुरा से कुछ दूर गाजियाबाद में आए लेकिन उस शहीद घर जाने की किसी भी सुध नहीं आई।जबकि एक मध्य प्रदेश के सीधी में शहीद सुधाकर के अंतिम संस्कार में स्वयं सीएम शिवराज सिंह पुहंचे और सुधाकर की शहादत को सलाम करेत हुए उसकी मिट्टी को अपने सिर से लगाया... लेकिन यूपी के मंत्रियों को इससे क्या कि जवान अपनी जान हत्थेली पर रखकर हमे रात की नींद चैन से सोने देते हैं ... लेकिन इन मंत्रियों को उनके अंतिम संस्कार में जाने के लिए निमंत्रण चाहिए .... वहीं मंत्री दुर्गाप्रसाद का कहना है कि उनको इसकी सूचना न थी , माननीय क्या सैफई महोत्सव की आपको सूचना थी कि प्रियंका चौपडा आरही है । तब तो सारी सरकार वहां मौजूद थी... तो फिर उस शहीद के यहां क्यों नहीं .... क्या यूपी सरकार के फिल्मी हस्तियां और कुश्ती प्रतियागिता.... शहीद कि चिता से ज्यादा जरूरी है ...तो अखिलेश जी आपकी सरकार से जनता को ये उम्मीद नहीं थी.. इस पर जरा ध्यान दीजिए ....वो शहीद बेटा मथुरा के शेरनगर का नहीं पूरे देश का बेटा है इस बेटे के परिवार को सिर्फ रूपेय से सहायता देने से कुछ नहीं होता । अगर उस बच्चे के सिर पर आप हाथ फेर देते और उस शहीद की मिट्टी को सिर से लगा लेते तो जो पुण्य आपको उस शहीद की राख को सिर में लगाने से मिलता वो आपको किसी मथुरा के मंदिर में जाकर नहीं मिलता ।

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